भविष्यवाणियां और धार्मिक उपाय: भविष्यमालिका, शनिदेव और नैतिक मूल्यों पर चर्चा
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1h ago

भविष्यवाणियां और धार्मिक उपाय: भविष्यमालिका, शनिदेव और नैतिक मूल्यों पर चर्चा

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ओडिशा के एक प्राचीन ग्रंथ, भविष्यमालिका में दर्ज भविष्यवाणियां आज की घटनाओं से जुड़ी मानी जा रही हैं, जिनमें जगन्नाथ मंदिर के कल्पवृक्ष का गिरना, मंदिर के शिखर से पत्थर गिरना और वैश्विक महामारी शामिल हैं। कुछ अनुयायियों और शोधकर्ताओं का दावा है कि ये भविष्यवाणियां सच साबित हुई हैं, हालांकि इस पर मतभेद हैं। वहीं, शनिदेव के अशुभ प्रभावों को दूर करने के लिए शनिवार को स्तोत्र पाठ करने का उपाय बताया जा रहा है। इसके अतिरिक्त, रक्षाबंधन के एक विज्ञापन में कृति सेनन की पोशाक पर 'रामायण' के लक्ष्मण की भूमिका निभाने वाले अभिनेता सुनील लहरी ने आपत्ति जताई है, उनका कहना है कि त्योहारों में हमारी संस्कृति और संस्कारों का सम्मान करना चाहिए। गायत्री तीर्थ शांतिकुंज में श्रावणी पर्व और रक्षाबंधन का आयोजन श्रद्धा और आध्यात्मिक उल्लास के साथ हुआ, जहां राष्ट्र और धर्म रक्षा का संकल्प लिया गया। पंचजanya के अनुसार, धन-धान्य से संपन्न देश भी सामाजिक एकता के बिना वैभवशाली नहीं हो सकता।

भविष्यमालिका की भविष्यवाणियां, जो लगभग 500-600 साल पहले ताड़ के पत्तों पर लिखी गई थीं, समय के साथ सच साबित होने का दावा करती हैं। 1999 के ओडिशा सुपर साइक्लोन के दौरान कल्पवृक्ष की शाखाओं के टूटने को इस ग्रंथ में वर्णित संकेतों से जोड़ा गया है। जगन्नाथ मंदिर के शिखर से पत्थर गिरने की घटनाओं को भी भविष्य मालिका में वर्णित संकटों के संकेत के रूप में देखा जा रहा है। इसके अलावा, ग्रंथ में अचानक फैलने वाली गंभीर बीमारियों का उल्लेख है, जिसे कुछ लोग 2020 की कोरोना महामारी से जोड़कर देख रहे हैं।

कृति सेनन के रक्षाबंधन विज्ञापन में ब्रालेट पहनने पर अभिनेता सुनील लहरी ने आपत्ति जताई है, उनका कहना है कि त्योहारों में नारी का सम्मान करना चाहिए और उनकी रक्षा करना मर्दानगी का असली अर्थ है। उन्होंने विज्ञापन का बहिष्कार करने की सराहना की।

शांतिकुंज में श्रावणी पर्व और रक्षाबंधन के अवसर पर, गायत्री परिजनों ने राष्ट्र और धर्म रक्षा के लिए संकल्प लिया और गुरुदेव श्रीराम शर्मा आचार्य एवं माताजी भगवती देवी शर्मा को श्रद्धा अर्पित की। अखिल विश्व गायत्री परिवार की प्रमुख डॉ. प्रणव पण्डया और शैलदीदी से रक्षा सूत्र और प्रसाद प्राप्त किया गया, जिसमें परिवार, समाज, संस्कृति और राष्ट्र की रक्षा का संकल्प शामिल था।

पंचजanya के अनुसार, केवल प्राकृतिक संसाधन किसी देश को महान नहीं बनाते, बल्कि वहां के लोगों की सामाजिक एकता ही उसे समृद्ध बनाती है। आंतरिक गृहयुद्ध, सामाजिक विभाजन और धार्मिक विद्वेष से जूझ रहे देशों के विपरीत, जापान और सिंगापुर जैसे देशों ने उच्च सामाजिक अनुशासन और राष्ट्रीय एकता के बल पर विकास किया है।

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