ब्राजील में लुइज़ इनासियो लूला दा सिल्वा ने राष्ट्रपति चुनाव जीत लिया है, जिससे देश में दक्षिणपंथी राजनीति को झटका लगा है। 80 वर्षीय लूला चौथी बार ब्राजील के राष्ट्रपति बनेंगे, उन्होंने कट्टर दक्षिणपंथी प्रतिद्वंद्वी फ्लावियो बोल्सोनारो को मामूली अंतर से हराया। लगभग सभी वोटों की गिनती के बाद, लूला को 51.76% वोट मिले, जबकि बोल्सोनारो को 48.24% वोट। यह जीत चुनावी सर्वे के अनुमानों के उलट है, जिनमें बोल्सोनारो को मामूली बढ़त दी गई थी। लूला का कार्यकाल 5 जनवरी 2027 से शुरू होगा।
इस चुनाव में मतदान प्रक्रिया विवादों से घिरी रही, क्योंकि सुप्रीम कोर्ट के एक जज ने मतदान केंद्रों के बंद होने का समय दो घंटे बढ़ा दिया था। यह फैसला लूला के गठबंधन की शिकायतों के बाद आया था, जिसमें कई राज्यों में सार्वजनिक परिवहन से जुड़ी समस्याओं का उल्लेख किया गया था। लैटिन अमेरिका में दक्षिणपंथी दलों की चुनावी जीत के रुझान को पलटते हुए लूला की दोबारा जीत से इस क्षेत्र में अमेरिकी प्रभाव बढ़ाने की महत्वाकांक्षाओं को झटका लगा है।
लूला ने डोनाल्ड ट्रंप की आक्रामक विदेश नीति की आलोचना की है, जबकि बोल्सोनारो ने व्हाइट हाउस में अपने वैचारिक सहयोगी के साथ करीबी संबंध बनाने का वादा किया था। अमेरिका ने ब्राजील पर व्यापार शुल्क और अन्य प्रतिबंध लगाए हैं। लूला ने डिजिटल प्लेटफॉर्म को रेगुलेट करने की जरूरत पर भी जोर दिया है और कहा है कि ब्राजील किसी के प्रभाव क्षेत्र में नहीं है। उन्होंने शासन के तरीके को बदलने और निर्णय लेने की प्रक्रिया में जनभागीदारी बढ़ाने का संकल्प लिया है।
हमारी समझ यह है कि लूला दा सिल्वा की जीत ब्राजील में दक्षिणपंथी राजनीति के लिए एक महत्वपूर्ण बदलाव का संकेत देती है। चुनावी सर्वेक्षणों के विपरीत, लूला की जीत से पता चलता है कि ब्राजील के मतदाताओं ने वाम-मध्य विचारधारा की ओर रुख किया है। यह जीत लैटिन अमेरिका में अमेरिकी प्रभाव को कम करने की महत्वाकांक्षाओं को भी चुनौती दे सकती है, क्योंकि लूला ने पहले डोनाल्ड ट्रंप की नीतियों की आलोचना की है।
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