नरेंद्र मोदी के गुरु लक्ष्मणराव इनामदार से उनकी पहली मुलाकात वड़नगर में एक RSS प्रचारक के रूप में हुई, जिसने उनके जीवन को बदल दिया। वहीं, डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन, बीसवीं सदी के एक अद्वितीय शिक्षक थे, जिन्होंने ऑक्सफोर्ड में 'हिन्यू व्यू ऑफ लाइफ' पर भाषण देकर भारत का गौरव बढ़ाया। अमेरिकी पत्रकार जेम्स थॉमस ने उनकी तुलना शिकागो के विश्वधर्म मंच पर स्वामी विवेकानन्द से की। राधाकृष्णन ने 40 वर्षों तक एक सफल शिक्षक के रूप में कार्य किया और शिक्षा के क्षेत्र में उनके योगदान के लिए, भारत में 5 सितंबर को शिक्षक दिवस मनाया जाता है। उन्हें 'भारत रत्न' से सम्मानित किया गया। उन्होंने भारतीय संस्कृति को बढ़ावा दिया और वैश्विक स्तर पर पूर्वी और पश्चिमी दर्शन के महापंडित के रूप में पहचान बनाई। एडिनबरा विश्वविद्यालय में भाषण देते हुए, उन्होंने विश्व शांति की स्थापना पर जोर दिया, जो आज भी प्रासंगिक है। राधाकृष्णन का मानना था कि शिक्षक मनुष्य के जीवन में संभावनाओं के द्वार खोलता है और राष्ट्र के गौरव को बढ़ाता है। उन्होंने शिक्षा के व्यवसायीकरण का विरोध किया और विद्यालयों को ज्ञान के शोध केंद्र के रूप में विकसित करना चाहा। उनका मानना था कि शिक्षा के माध्यम से मानव मस्तिष्क का सर्वोत्तम उपयोग किया जा सकता है।
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