नेपाल में हाल ही में आई बाढ़ के बाद, नेपाली सेना और निजी हेलीकॉप्टरों ने हवाई मार्ग से 4,000 से अधिक लोगों को बचाया है। बाढ़ के तुरंत बाद, नेपाली सेना का पहला हेलीकॉप्टर बचाव अभियान के लिए रवाना हो गया था, और सरकार को बाढ़ से हुए नुकसान की पहली जानकारी भी हेलीकॉप्टर के माध्यम से ही मिली। नेपाल में इतने बड़े पैमाने पर बचाव अभियान पहले कभी नहीं चलाया गया। गृह मंत्री सुधन गुरूंग ने इसे नेपाल में अब तक का सबसे बड़ा अभियान बताया है। बचाव अभियान में सेना के सात और निजी क्षेत्र के लगभग दो दर्जन हेलीकॉप्टरों ने भाग लिया। रासुवा के मुख्य जिला अधिकारी नरेंद्र परियार के अनुसार, बाढ़ वाले दिन दोपहर से पहले ही कई इलाकों की सड़कें कट गई थीं, जिसके बाद हेलीकॉप्टर ही लोगों की एकमात्र उम्मीद थे।
हालांकि, वैज्ञानिकों का कहना है कि हिमालय के ग्लेशियरों पर प्रदूषण का स्तर बढ़ रहा है, जिससे बर्फ पिघलने की रफ्तार तेज हो गई है और आपदाओं का खतरा बढ़ सकता है। कोलंबिया यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर मार्को टेडेस्को के अनुसार, ग्लेशियर पतले होने पर प्रदूषण का प्रभाव और भी अधिक होता है। चाइनीज एकेडमी ऑफ साइंसेज के शोधकर्ताओं के एक अध्ययन में पाया गया कि 2007 से 2016 के बीच हिमालय में ग्लेशियरों के कुल नुकसान में दक्षिण एशिया से आने वाले ब्लैक कार्बन का हिस्सा लगभग एक-तिहाई था। कोविड लॉकडाउन के दौरान प्रदूषण कम होने से बर्फ की परत फिर से चमकदार हो गई थी और बर्फ पिघलने की प्रक्रिया में लगभग 40 प्रतिशत तक कमी आई थी। नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनल ने इस आपदा को 'हिमालयी सुनामी' बताया है और पड़ोसी देशों और अंतरराष्ट्रीय समुदाय से मदद का अनुरोध किया है। उन्होंने चीन, अमेरिका और भारत को दुनिया के सबसे बड़े ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जक बताते हुए इन देशों से कमजोर देशों को मुआवजा देने की जिम्मेदारी उठाने का आह्वान किया है। बचाव अभियान के दौरान, शवों को निकालने और राहत सामग्री पहुंचाने के लिए हेलीकॉप्टरों का उपयोग किया जा रहा है, लेकिन पायलटों का कहना है कि शुरुआती दिनों में सबसे ज्यादा खतरे में पड़े लोगों को प्राथमिकता देना सबसे मुश्किल काम था।
मूल कवरेज पढ़ें
💬 टिप्पणियाँ
📜 टिप्पणी नीति