रिलायंस इंडस्ट्रीज की डिजिटल और दूरसंचार इकाई जियो प्लेटफॉर्म्स के ₹30,213 करोड़ के आईपीओ को निवेशकों का भारी समर्थन मिल रहा है। आईपीओ का तीसरा दिन भी उत्साहपूर्वक बीता और यह 5.81 गुना सब्सक्राइब हो गया है। यह भारत का अब तक का सबसे बड़ा आईपीओ है, जिसने 100 मिनट में ही फुल सब्सक्राइब होने का रिकॉर्ड बनाया। क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स (QIBs) सबसे आगे हैं, जिनका कोटा 13.31 गुना भर चुका है, जबकि नॉन-इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स (NIIs) का कोटा 6.68 गुना सब्सक्राइब हुआ है। रिटेल निवेशकों का कोटा 1.66 गुना सब्सक्राइब हो गया है। कंपनी ने आईपीओ खुलने से पहले एलआईसी, ब्लैकरॉक और फिडेलिटी जैसे प्रमुख संस्थानों से ₹8,110 करोड़ जुटाए थे। ग्रे मार्केट में जियो प्लेटफॉर्म्स के शेयरों का प्रीमियम ₹246 प्रति शेयर तक पहुंच गया है, जिससे लिस्टिंग पर ₹1,365 प्रति शेयर का संभावित मूल्य अनुमान लगाया जा रहा है। ब्रोकरेज हाउस ने इस आईपीओ को सकारात्मक रूप से देखा है, लेकिन बाजार में सुस्त माहौल के बीच ग्रे मार्केट प्रीमियम में नरमी आई है। निवेशक अब इस बात पर विचार कर रहे हैं कि क्या लिस्टिंग पर मुनाफा कमाने के लिए इस आईपीओ में निवेश करना सही है या जियो के कारोबार और भविष्य की संभावनाओं को देखते हुए लंबे समय के लिए निवेश करना बेहतर होगा।
हमारी समझ यह है कि जियो प्लेटफॉर्म्स का आईपीओ निवेशकों के बीच काफी उत्साह पैदा कर रहा है, खासकर संस्थागत निवेशकों के बीच। प्रारंभिक सब्सक्रिप्शन दरें मजबूत हैं, लेकिन बाजार की स्थितियों और ग्रे मार्केट प्रीमियम में नरमी को देखते हुए, लिस्टिंग पर लाभ की संभावना अनिश्चित बनी हुई है। निवेशक अब अल्पकालिक लाभ या दीर्घकालिक विकास क्षमता के बीच चयन करने पर विचार कर रहे हैं।
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