चुनाव आयोग ने एसआईआर फैसलों पर सुप्रीम कोर्ट में जवाब दाखिल किया
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20m ago

चुनाव आयोग ने एसआईआर फैसलों पर सुप्रीम कोर्ट में जवाब दाखिल किया

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भारत के चुनाव आयोग (ईसीआई) ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) से जुड़े सभी फैसले सर्वसम्मति से लिए गए थे। यह जवाब मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के कामकाज और आयोग के कुछ फैसलों की वैधता को चुनौती देने वाली एक याचिका के जवाब में दाखिल किया गया है। आयोग ने याचिकाकर्ता राकेश कुमार सिंह द्वारा दायर याचिका में किए गए आरोपों का खंडन किया है, जिसमें दावा किया गया था कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी की आपत्तियों के बावजूद मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने एसआईआर से जुड़े फैसले अकेले लिए थे। आयोग ने कहा कि 24 जून 2025, 27 अक्टूबर 2025 और 14 मई 2026 के एसआईआर से जुड़े तीनों आदेश आयोग के सर्वसम्मत फैसले थे, जिन्हें मुख्य चुनाव आयुक्त और दोनों चुनाव आयुक्तों ने मंजूरी दी थी। आयोग ने यह भी तर्क दिया कि याचिका पूरी तरह से एक अखबार की रिपोर्ट पर आधारित है और याचिकाकर्ता ने दावों की तथ्यात्मक सच्चाई की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं की है। आयोग ने स्पष्ट किया कि फ़ाइल पर कार्रवाई के दौरान मुख्य चुनाव आयुक्त या चुनाव आयुक्तों की ओर से दर्ज किए गए नोट, सवाल, सुझाव या टिप्पणियां अपने आप में आयोग के फैसले नहीं माने जा सकते। फ़ाइलें आम तौर पर पहले एक चुनाव आयुक्त के पास जाती हैं, फिर दूसरे के पास और अंत में मुख्य चुनाव आयुक्त के पास। मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्त (नियुक्ति, सेवा की शर्तें और कार्यकाल) अधिनियम, 2023 की धारा 18 के तहत, आयोग के फैसले जहां तक संभव हो, सर्वसम्मति से होने चाहिए और यदि सर्वसम्मति नहीं बन पाती है तो बहुमत से फैसला किया जाना चाहिए। यह मामला दिल्ली के वकील शैलेंद्र मणि त्रिपाठी और राकेश कुमार सिंह की याचिकाओं से जुड़ा है, जिसमें एसआईआर और मतदाता सूची से जुड़े कुछ फैसलों को पूरे चुनाव आयोग की सहमति के बिना लिए जाने का आरोप लगाया गया है। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार, चुनाव आयोग, मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और अन्य संबंधित पक्षों से जवाब मांगा था, लेकिन मुख्य चुनाव आयुक्त के तौर पर ज्ञानेश कुमार को काम करने से रोकने की अंतरिम मांग को स्वीकार नहीं किया था।

पृष्ठभूमि

  • भारत का चुनाव आयोग (ईसीआई) भारत में चुनाव कराने के लिए जिम्मेदार संवैधानिक संस्था है [background knowledge]।
  • मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्त (नियुक्ति, सेवा की शर्तें और कार्यकाल) अधिनियम, 2023 आयोग के सदस्यों की नियुक्ति और सेवा शर्तों को नियंत्रित करता है [Fact Refinery, 2023-MM-DD - *assuming this is the date of the act’s passage*].
  • मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) एक नियमित प्रक्रिया है जिसका उपयोग मतदाता सूची को अद्यतन और साफ करने के लिए किया जाता है [background knowledge]।
  • 24 जून 2025, 27 अक्टूबर 2025 और 14 मई 2026 की एसआईआर तिथियां आयोग द्वारा निर्धारित की गई थीं [Fact Refinery, 2024-MM-DD - *date of the article*]।

हमारा आकलन

हमारी समझ यह है कि चुनाव आयोग इस बात पर जोर दे रहा है कि एसआईआर से संबंधित सभी निर्णय सर्वसम्मति से लिए गए थे, और याचिका में लगाए गए आरोप निराधार हैं। आयोग का तर्क है कि आंतरिक चर्चाओं और टिप्पणियों को सर्वसम्मति के अभाव में लिए गए निर्णयों के प्रमाण के रूप में नहीं माना जा सकता है, और यह कि याचिका केवल एक समाचार रिपोर्ट पर आधारित है। हमें लगता है कि आयोग अपनी प्रक्रियाओं की पारदर्शिता और वैधता स्थापित करने का प्रयास कर रहा है।

किस पर नज़र रखें

  • सुप्रीम कोर्ट द्वारा केंद्र सरकार, चुनाव आयोग और संबंधित पक्षों से दाखिल किए गए जवाबों पर क्या प्रतिक्रिया दी जाती है, इस पर ध्यान दें [Supreme Court of India website]।
  • एसआईआर से संबंधित आयोग के सर्वसम्मति वाले निर्णयों के आधिकारिक रिकॉर्ड की जांच करें, ताकि यह देखा जा सके कि क्या वे याचिका में किए गए दावों का समर्थन करते हैं [Election Commission of India website]।
  • याचिका पर अगली सुनवाई की तारीख और अदालत के निर्देशों पर नज़र रखें [Supreme Court of India case tracker]।
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