गणेश जी के 12 नामों का जाप धार्मिक मान्यता के अनुसार फलदायी माना जाता है। वहीं, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के ‘सुभाषितम्’ से लिया गया एक श्लोक राष्ट्र की शक्ति और संस्कृति के महत्व पर प्रकाश डालता है। यह श्लोक बताता है कि केवल धर्म और संस्कृति होना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि राष्ट्र को संगठित शक्ति की भी आवश्यकता है ताकि वह वैश्विक मंच पर आदर का पात्र बन सके।
संघ के अनुसार, एक राष्ट्र को वैश्विक सम्मान प्राप्त करने के लिए उत्तम धर्म, श्रेष्ठ संस्कृति, धीरोदात्त गुणों और संगठित शक्ति का समन्वय आवश्यक है। यह श्लोक इस बात पर जोर देता है कि सॉफ्ट पावर के साथ-साथ हार्ड या संगठित शक्ति भी आवश्यक है। भारत के समृद्ध इतिहास और संस्कृति के बावजूद, समाज में संगठित शक्ति और एकजुटता की कमी होने पर देश को वैश्विक मंच पर उचित स्थान और सम्मान नहीं मिल पाता है।
आज की भू-राजनीतिक परिस्थितियों में, केवल ‘अच्छा’ या ‘शांत प्रिय’ होना पर्याप्त नहीं है। शक्ति-संतुलन की दुनिया में, सांस्कृतिक समृद्धि के साथ-साथ आंतरिक अनुशासन, एकजुटता और शक्तिशाली होना भी महत्वपूर्ण है। यह श्लोक नागरिकों को अपनी गौरवशाली संस्कृति पर गर्व करने के साथ-साथ राष्ट्रहित के लिए संगठित और अनुशासित होने का संदेश देता है।
मूल कवरेज पढ़ें
💬 टिप्पणियाँ
📜 टिप्पणी नीति