कोलकाता में एक युवक और उसके बुजुर्ग पिता को पीटने और नग्न करके घुमाने की शर्मनाक घटना सामने आई है, जिसकी वजह प्रेम संबंध बताया जा रहा है। वहीं, ग्वालियर के दारुल कुरआन मदरसे से रेस्क्यू किए गए 26 बच्चों ने मदरसे में गंभीर उत्पीड़न के आरोप लगाए हैं। बच्चों का आरोप है कि उन्हें लोहे की रॉड से पीटा जाता था, घंटों तक मुर्गे की तरह खड़ा रखा जाता था, और भोजन की कमी से जूझना पड़ता था। बच्चियों ने घरेलू काम करने और हिजाब पहनने के लिए दबाव बनाने की भी शिकायत की है।
कोलकाता की घटना में, एक युवक और उसके पिता को पहले बुरी तरह पीटा गया, फिर उन्हें निर्वस्त्र कर घुमाया गया। यह घटना प्रेम संबंध के कारण हुई बताई जा रही है। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है, लेकिन अभी तक कोई गिरफ्तारी नहीं हुई है।
ग्वालियर में, बाल अधिकार संरक्षण आयोग और बाल कल्याण समिति की कार्रवाई के बाद 26 बच्चों को दारुल कुरआन मदरसे से रेस्क्यू किया गया। इनमें 18 लड़के और 8 लड़कियां शामिल हैं। बच्चों ने आरोप लगाया कि मदरसे में मामूली गलतियों पर भी उन्हें पीटा जाता था। उन्हें लोहे की रॉड से लटकाकर पीटा जाता था और घंटों तक मुर्गे की तरह खड़ा रखा जाता था। बच्चों ने यह भी बताया कि उन्हें सुबह और शाम केवल दो-दो रोटियां मिलती थीं और अतिरिक्त भोजन मांगने पर मना कर दिया जाता था। बच्चियों ने आरोप लगाया कि उनसे झाड़ू-पोछा लगाने, बर्तन और कपड़े धोने जैसे काम करवाए जाते थे, और छत से कपड़े उतारने में देर होने पर उनके साथ मारपीट की जाती थी। उन पर जबरन हिजाब पहनने का भी दबाव डाला जा रहा था। एक बच्ची ने यह भी आरोप लगाया कि मदरसे में रहने वाले एक व्यक्ति का बेटा रात में खिड़की से उनकी ओर ताक-झांक करता था, लेकिन शिकायत करने पर भी कोई कार्रवाई नहीं हुई।
प्रशासन ने मदरसे को सील कर दिया है और दस्तावेजों की जांच शुरू कर दी है। झांसी रोड एसडीएम अतुल सिंह ने बताया कि मदरसे को सील कर नोटिस जारी किया गया है और CWC के सामने बच्चों के बयान दर्ज किए जा रहे हैं। कलेक्टर रुचिका चौहान और बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष डॉ. निवेदिता शर्मा के सामने भी बच्चों ने अपनी बात रखी है। प्रशासन का कहना है कि दस्तावेजों और बच्चों के बयानों की जांच के बाद मामले में नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी।
हमारी समझ यह है कि यह रिपोर्ट दो अलग-अलग लेकिन गंभीर मामलों को उजागर करती है, जिसमें कोलकाता में सार्वजनिक अपमान और ग्वालियर में संस्थागत दुर्व्यवहार शामिल है। दोनों ही मामलों में, पीड़ितों को शारीरिक और भावनात्मक पीड़ा का सामना करना पड़ा, और अधिकारियों ने जांच शुरू कर दी है। यह स्पष्ट है कि इन घटनाओं में कठोर दंड और शोषण शामिल है, और प्रशासन उचित कार्रवाई करने के लिए प्रतिबद्ध है।
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