एफिल टावर सोमवार को कर्मचारियों की हड़ताल के कारण बंद रहा, जिसके पीछे कारण एक हिंदू धार्मिक समूह, बोचासनवासी अक्षर पुरुषोत्तम स्वामीनारायण संस्था (बाप्स) का दौरा था। कर्मचारियों का आरोप है कि बाप्स समूह के आने पर महिला कर्मचारियों को उनके कार्यस्थलों से हटा दिया गया, ताकि पुरुष कर्मचारी उनकी जगह ले सकें। इस घटना से कर्मचारियों में नाराज़गी फैल गई है और फ्रांस के राजनेताओं ने इसकी आलोचना की है। बाप्स ने माफ़ी मांगी है, लेकिन कहा है कि यात्रा टावर की टीम के साथ समन्वय करके आयोजित की गई थी और किसी को प्रवेश से नहीं रोका गया था। एसईटीई, जो एफिल टावर का संचालन करती है, ने कहा कि बाप्स समूह ने अपनी यात्रा की एक शर्त के तौर पर महिला कर्मचारियों के साथ सीमित बातचीत का अनुरोध किया था, जिसे स्वीकार नहीं किया जाना चाहिए था। इस घटना के बाद, कुछ लोगों ने चिंता जताई है कि इससे विदेशों में हिंदूफोबिया बढ़ सकता है, जबकि अन्य ने बाप्स की नीतियों की आलोचना की है। न्यूयॉर्कर के ईशान थरूर ने बाप्स को 'शर्मनाक और पिछड़ी सोच वाली संस्था' बताया है, वहीं ऑप इंडिया की नूपुर जे शर्मा का कहना है कि बाप्स के कारण विदेशों में हिंदूफोबिया को बढ़ावा मिलेगा। भारत के विदेश मंत्रालय ने कहा कि यह मामला पूरी तरह से संबंधित पक्षों के बीच का है। उज्जैन में, श्री खड़े हनुमान मंदिर को लेकर प्रशासनिक कार्रवाई की आशंका के बीच विवाद बढ़ गया है, जहां पुजारी प्रशासन पर दबाव बनाने के आरोप लगा रहे हैं और देशभर से श्रद्धालु मंदिर पहुंच रहे हैं। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) और हिंदुत्व के बारे में दुनिया में जिज्ञासा बढ़ रही है, जिसके कारण सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने अमेरिका, कनाडा और इंग्लैंड का दौरा निर्धारित किया है।
हमारी समझ यह है कि एफिल टावर पर बाप्स समूह के दौरे के दौरान हुई घटनाओं ने फ्रांस में एक विवाद पैदा कर दिया है, जिसमें कर्मचारियों के अधिकारों और धार्मिक समूहों की मांगों के बीच तनाव स्पष्ट है। हमें लगता है कि यह मामला न केवल एक स्थानीय श्रम विवाद है, बल्कि इसमें धार्मिक स्वतंत्रता, लैंगिक समानता और विदेशों में हिंदू धर्म की छवि जैसे व्यापक मुद्दे भी शामिल हैं। यह भी स्पष्ट है कि विभिन्न मीडिया आउटलेट इस घटना के विभिन्न पहलुओं पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं, जिसमें एफिल टावर विवाद, उज्जैन मंदिर विवाद और आरएसएस की बढ़ती वैश्विक जिज्ञासा शामिल है।
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