अक्टूबर में देश का जीएसटी संग्रह 23% बढ़कर ₹2.31 लाख करोड़ से अधिक हो गया है, जो एक रिकॉर्ड स्तर है। सरकार के खजाने में यह बंपर कमाई हुई है। अप्रैल से अक्टूबर तक, इस वित्तीय वर्ष के पहले सात महीनों में कुल जीएसटी संग्रह 14.78 लाख करोड़ रुपये रहा, जो पिछले वर्ष की तुलना में 13.2% अधिक है। घरेलू लेनदेन से ₹1.59 लाख करोड़ का संग्रह हुआ, जो पिछले वर्ष से 15.8% अधिक है, जबकि आयात से ₹72,246 करोड़ का संग्रह हुआ, जिसमें 42.2% की तेज वृद्धि देखी गई। रिफंड काटने के बाद, शुद्ध जीएसटी संग्रह ₹2.03 लाख करोड़ रहा, जिसमें 25.6% की वृद्धि हुई।
महाराष्ट्र सबसे आगे रहा, जहां ₹35,150 करोड़ का संग्रह हुआ, जो पिछले वर्ष से 13% अधिक है। कर्नाटक में ₹15,922 करोड़ (18% ऊपर), गुजरात में ₹13,516 करोड़ (16% ऊपर), उत्तर प्रदेश में ₹10,235 करोड़ (24% ऊपर), हरियाणा में ₹11,529 करोड़ (17% ऊपर), दिल्ली में ₹9,298 करोड़ (10% ऊपर) और पंजाब में ₹2,856 करोड़ (25% ऊपर) का संग्रह हुआ। असम में सबसे तेज वृद्धि देखी गई, जहां ₹1,934 करोड़ आए, जो 47% अधिक है। झारखंड में 31% बढ़कर ₹2,821 करोड़, मध्य प्रदेश में 29% बढ़कर ₹3,768 करोड़ रहा।
कुछ राज्यों में गिरावट भी आई, जैसे कि सिक्किम में 28% घटकर ₹221 करोड़, लद्दाख में 20% घटकर ₹63 करोड़, पुडुचेरी में 7% घटकर ₹179 करोड़ और हिमाचल प्रदेश में 2% घटकर ₹704 करोड़। जीएसटी संग्रह में यह वृद्धि अर्थव्यवस्था के लिए एक अच्छा संकेत है, क्योंकि यह कारोबार और खपत दोनों में सुधार का संकेत देती है। सरकार के पास अधिक राजस्व आने से बुनियादी ढांचे, सब्सिडी या अन्य योजनाओं पर पैसे लगाने में आसानी होती है, और राज्यों को भी अधिक हिस्सा मिलता है, जिससे उनके बजट पर दबाव कम होता है।
हमारी समझ यह है कि जीएसटी संग्रह में उल्लेखनीय वृद्धि, विशेष रूप से घरेलू लेनदेन और आयात दोनों में, भारतीय अर्थव्यवस्था में सकारात्मक गतिशीलता का संकेत देती है। यह सरकार के लिए राजस्व में वृद्धि करता है, जिससे बुनियादी ढांचे और सामाजिक कार्यक्रमों में निवेश के लिए अधिक अवसर मिलते हैं। जबकि कुछ राज्यों में गिरावट देखी गई, अधिकांश राज्यों में वृद्धि दर्शाती है कि यह सुधार व्यापक है।
मूल कवरेज पढ़ें
💬 टिप्पणियाँ
📜 टिप्पणी नीति