एसआईआर प्रक्रिया में 2003 और 2025 के बीच अंतर
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Image: Bbc Hindi
भारत निर्वाचन आयोग द्वारा मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण (एसआईआर) की वर्तमान प्रक्रिया को लेकर उठ रहे सवालों के बीच, यह सामने आया है कि 2003 में अपनाई गई प्रक्रिया से इसमें कई अंतर हैं। एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (एडीआर) और सामाजिक कार्यकर्ता योगेंद्र यादव ने इन अंतरों को उजागर किया है। एडीआर के अनुसार, 2003 की प्रक्रिया छह महीने से अधिक चली थी, जिसमें मतदाता सूची के एकीकरण से लेकर अंतिम सूची के प्रकाशन तक कई चरण शामिल थे। इसके विपरीत, 2025 का एसआईआर केवल तीन महीनों में पूरा किया गया। 2003 में, मतदाता सूची में नाम शामिल करने और डेटा अपडेट करने की मुख्य जिम्मेदारी एन्यूमरेटर की थी, जो घर-घर जाकर जानकारी इकट्ठा करते थे। जबकि 2025 के एसआईआर में यह जिम्मेदारी मतदाताओं पर डाल दी गई है, जिन्हें स्वयं एन्यूमरेशन फॉर्म भरकर जमा करना है। योगेंद्र यादव का कहना है कि 2003 में किसी भी मतदाता से एन्यूमरेशन फॉर्म नहीं भरवाया गया था, और एन्यूमरेटर पुरानी मतदाता सूची में संशोधन करते थे। इन अंतरों के कारण, एसआईआर प्रक्रिया आगामी विधानसभा चुनावों में एक मुद्दा बन सकती है, खासकर उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में। भाजपा के कुछ नेताओं ने यह भी तर्क दिया है कि एसआईआर जैसी प्रक्रिया पहले भी कांग्रेस के शासनकाल में होती रही है, लेकिन एडीआर का कहना है कि 2003 की प्रक्रिया को 2025 के एसआईआर के लिए मिसाल के तौर पर इस्तेमाल नहीं किया जा सकता।
कहाँ भिन्न हैं
- बीबीसी हिंदी ने एसआईआर प्रक्रिया के समय-सीमा और जिम्मेदारी के अंतर पर अधिक ध्यान केंद्रित किया, जबकि अमर उजाला ने एसआईआर, चंदा चोरी और यूजीसी के नए नियमों के कारण आगामी चुनावों में भाजपा के लिए संभावित चुनौतियों पर जोर दिया।
- अमर उजाला ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और प्रधानमंत्री मोदी के बीच कथित दूरी की खबरों का खंडन किया, जबकि बीबीसी हिंदी ने इस मुद्दे पर कोई टिप्पणी नहीं की।
अभी क्या ज्ञात नहीं है
- एसआईआर प्रक्रिया में हुई किसी भी संभावित अनियमितता की जांच का परिणाम अभी तक ज्ञात नहीं है।
- यह स्पष्ट नहीं है कि एसआईआर प्रक्रिया का मतदाताओं की भागीदारी और चुनाव परिणामों पर कितना प्रभाव पड़ेगा।
पृष्ठभूमि
- भारत निर्वाचन आयोग मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण (एसआईआर) की प्रक्रिया संचालित करता है [Fact Refinery, 2024-05-16].
- 2003 में एसआईआर प्रक्रिया छह महीने से अधिक चली थी, जिसमें मतदाता सूची के एकीकरण से लेकर अंतिम सूची के प्रकाशन तक कई चरण शामिल थे [Fact Refinery, 2024-05-16].
- एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (एडीआर) एक संगठन है जो चुनाव सुधारों पर काम करता है [background knowledge].
- मतदाता सूची में नाम शामिल करने और डेटा अपडेट करने की जिम्मेदारी पहले एन्यूमरेटर की थी, जो घर-घर जाकर जानकारी इकट्ठा करते थे [Fact Refinery, 2024-05-16].
हमारा आकलन
हमारी समझ यह है कि वर्तमान एसआईआर प्रक्रिया, 2003 की प्रक्रिया से काफी अलग है, खासकर समय-सीमा और जिम्मेदारी के मामले में. यह बदलाव, मतदाताओं पर अधिक जिम्मेदारी डालता है, और एडीआर इसे 2003 की प्रक्रिया से तुलना करने योग्य नहीं मानता. इन अंतरों के कारण आगामी चुनावों में एसआईआर एक विवाद का विषय बन सकता है, विशेष रूप से उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में.
किस पर नज़र रखें
- एसआईआर प्रक्रिया में किसी भी संभावित अनियमितता की जांच के परिणाम, भारत निर्वाचन आयोग की वेबसाइट पर [https://eci.gov.in/] देखें.
- आगामी विधानसभा चुनावों में मतदाताओं की भागीदारी के आंकड़े, चुनाव आयोग द्वारा जारी किए जाने वाले डेटा में जांचें [https://eci.gov.in/].
- उत्तर प्रदेश में एसआईआर प्रक्रिया को लेकर उठने वाले किसी भी कानूनी विवाद की जानकारी, न्यायालय की वेबसाइटों पर उपलब्ध होगी [उच्च न्यायालय की वेबसाइट].
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