कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक और संयोजक अभिजीत दिपके ने दशहरा के मौके पर एक वीडियो संदेश जारी कर बताया कि पार्टी के बड़े फैसले सह-संयोजक आशुतोष रांका और सौरव दास ही लेते थे, और वह केवल उनके निर्देशों का पालन करते थे। दिपके ने कहा कि वह दोनों उनके भाई जैसे हैं और उन्होंने ही आंदोलन को आगे बढ़ाया। उन्होंने यह भी बताया कि दोनों की निर्णय लेने की क्षमता उनसे बेहतर है।
दिपके के अनुसार, बाहर से ऐसा लग सकता है कि वह आंदोलन का नेतृत्व कर रहे थे, लेकिन वास्तविकता यह है कि सौरव और आशुतोष ही उन्हें बताते थे कि अगले दिन कहां जाना है और क्या करना है। उन्होंने बताया कि तीनों का एक व्हाट्सएप ग्रुप था जिसमें वे मीम्स साझा करते थे, और वह अभी भी उस ग्रुप को खोलते हैं। सौरव दास और आशुतोष रांका 13 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर राष्ट्रीय ध्वज फहराने की कोशिश के बाद न्यायिक हिरासत में हैं, उन पर पीस बॉन्ड तोड़ने और मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग करने का आरोप है।
फ्रांस में हुई हालिया घटनाओं पर प्रतिक्रिया देते हुए, दिपके ने कहा कि सौरव और आशुतोष ने जेल जाने के बावजूद शांतिपूर्ण रास्ता चुना, और उनकी तुलना महात्मा गांधी के सत्याग्रह से की जा सकती है। उन्होंने यह भी घोषणा की कि दिवाली तक CJP की ओर से कोई प्रदर्शन आयोजित करने की योजना नहीं है, और समर्थकों से ब्रेक लेकर परिवार के साथ समय बिताने का आग्रह किया है।
हमारी समझ यह है कि अभिजीत दिपके CJP के भीतर अपनी भूमिका को कम करके आंक रहे हैं, यह सुझाव देते हुए कि वास्तविक निर्णय लेने की शक्ति सौरव दास और आशुतोष रांका के पास थी। यह बयान, दशहरा पर जारी किया गया, एक रणनीतिक कदम हो सकता है, जो गिरफ्तार सह-संयोजकों के प्रति सहानुभूति पैदा करता है और दिपके को आंदोलन से अलग करता है। दिपके का यह दावा कि वह केवल निर्देशों का पालन करते थे, यह दर्शाता है कि पार्टी के भीतर शक्ति का एक अनौपचारिक ढांचा मौजूद था, जहां औपचारिक पदनाम वास्तविक प्रभाव को प्रतिबिंबित नहीं करते थे।
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