राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू 23 अक्टूबर को छत्तीसगढ़ के जगदलपुर में आयोजित विश्व प्रसिद्ध बस्तर दशहरा के मुरिया दरबार को संबोधित करेंगी और बस्तरिया आदिवासियों की फरियाद सुनेंगी। मुरिया दरबार, बस्तर संभाग के आदिवासियों की एक महत्वपूर्ण रस्म है, जिसे आम बोलचाल की भाषा में आदिवासियों की अनोखी संसद कहा जाता है। इसकी शुरुआत राजशाही दौर में हुई थी, जब राजा-महाराजा आदिवासियों की समस्याओं को सुनते थे और उनका समाधान करने का प्रयास करते थे। वर्तमान में, इस दरबार के मुखिया देश के राष्ट्रपति होते हैं, क्योंकि छत्तीसगढ़ की बैगा, कोरवा, पंडो और मूरिया जनजातियाँ उन्हें अपना दत्तक पुत्र मानती हैं। 15 अगस्त 2026 को, बस्तर के आदिवासियों ने राष्ट्रपति मुर्मू को मुरिया दरबार में शामिल होने का निमंत्रण दिया था। कमलचंद्र भंजदेव वर्तमान में बस्तर राजपरिवार के वारिस और राजा माने जाते हैं।
उत्तराखंड में कुंजापुरी मेले के दौरान गायक दलेर मेहंदी के शराब पीने के आरोप को लेकर भी मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि कार्यक्रम के दौरान जनता की तरफ से कोई दबाव रहा होगा और वह जल्द ही मीका सिंह और दलेर मेहंदी से इस मामले में बात करेंगे। फिल्म इंडस्ट्री की संस्था FWICE ने इस घटना को वरिष्ठ कलाकार का अपमान बताया है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री धामी से इस मामले में हस्तक्षेप करने का अनुरोध किया है।
हमारी समझ यह है कि राष्ट्रपति मुर्मू का मुरिया दरबार में भाग लेना एक प्रतीकात्मक रूप से महत्वपूर्ण घटना है, जो बस्तर के आदिवासियों के साथ उनके गहरे संबंध को दर्शाती है। यह दरबार, जो सदियों से चली आ रही परंपरा है, राष्ट्रपति को सीधे तौर पर आदिवासी समुदाय की चिंताओं को सुनने और संबोधित करने का अवसर प्रदान करता है। साथ ही, उत्तराखंड में गायक दलेर मेहंदी से जुड़े आरोपों पर मुख्यमंत्री धामी की प्रतिक्रिया दर्शाती है कि सार्वजनिक कार्यक्रमों में कलाकारों के आचरण को लेकर संवेदनशीलता बनी हुई है।
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