पाकिस्तान, तुर्की, कतर और इंडोनेशिया के बीच रक्षा समझौता
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1h ago

पाकिस्तान, तुर्की, कतर और इंडोनेशिया के बीच रक्षा समझौता

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Image: Aajtak

पाकिस्तान ने तुर्की, कतर और इंडोनेशिया के साथ 'बद्र समझौता' नामक एक रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। दोहा में बुधवार को इस समझौते पर हस्ताक्षर किए गए, जिसका उद्देश्य रक्षा सहयोग को बढ़ावा देना और चारों देशों की रक्षा क्षमताओं को मजबूत करना है। समझौते का नाम 'बद्र' के स्थान पर रखा गया है, जो शुरुआती मुसलमानों और मक्का के कबीलों के बीच हुई पहली बड़ी सैन्य लड़ाई की जगह है। तुर्की के रक्षा मंत्रालय के अनुसार, पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ, तुर्की के रक्षा मंत्री यासर गुलर, कतर के उप प्रधानमंत्री और रक्षा राज्य मंत्री शेख सऊद बिन अब्दुल रहमान, और इंडोनेशिया के उप रक्षा मंत्री यूसुफ जौहरी ने इस समझौते पर हस्ताक्षर किए। कतर के रक्षा मंत्रालय ने बताया कि इस समझौते का उद्देश्य रक्षा विनिर्माण के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाना, रक्षा क्षमताओं को मजबूत करना, और तकनीकी रक्षा प्रशिक्षण तथा अनुसंधान एवं विकास में मिलकर काम करना है। यह घटनाक्रम अगस्त में पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्की के बीच हुए 'मक्का संयुक्त रक्षा समझौते' के बाद सामने आया है, जिसके तहत किसी एक देश पर हमला होने पर उसे सभी देशों पर हमला माना जाएगा।

कतर के रक्षा मंत्रालय के अनुसार यह समझौता शामिल देशों के लिए आर्थिक रूप से महत्वपूर्ण है, जिससे रक्षा विनिर्माण क्षमताओं का लाभ उठाया जा सकेगा और सहयोग बढ़ेगा। यह घटनाक्रम खाड़ी क्षेत्र में बढ़ते तनाव के बीच सामने आया है। वहीं, द क्विंट में प्रकाशित शरजील इमाम के एक साक्षात्कार में, उन्होंने धर्मनिरपेक्षता को खारिज कर दिया और इसे हिंदुत्व ढांचा बताया, जिसमें मुस्लिम, ईसाई, द्रविड, आदिवासी और दलित जैसे वंचित वर्गों के लिए कोई स्थान नहीं है। इमाम ने भारत के प्राचीन अस्तित्व से भी इनकार किया और जवाहरलाल नेहरू की पुस्तक 'भारत एक खोज' की आलोचना की। उनका तर्क है कि भारत का धर्मनिरपेक्ष ढांचा अल्पसंख्यकों का दमन करता है। शरजील इमाम ने यह भी कहा कि इस्लाम ही राष्ट्र की पहचान का दायरा है, लेकिन उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि इतने सारे इस्लामिक मुल्क क्यों हैं और वे आपस में क्यों लड़ रहे हैं।

कहाँ भिन्न हैं

  • aajtak ने रक्षा समझौते पर ध्यान केंद्रित किया, जबकि पांचजन्य ने शरजील इमाम के साक्षात्कार और उनके विचारों पर जोर दिया।
  • पांचजन्य ने शरजील इमाम के विचारों को 'अलगाववादी मानसिकता' के रूप में चित्रित किया, जबकि aajtak ने इस पर कोई टिप्पणी नहीं की।

अभी क्या ज्ञात नहीं है

  • पाकिस्तान के विदेश कार्यालय ने 'बद्र समझौते' पर अभी तक कोई टिप्पणी नहीं की है, इसलिए उनकी आधिकारिक प्रतिक्रिया अज्ञात है।

पृष्ठभूमि

  • पाकिस्तान, तुर्की, कतर और इंडोनेशिया के बीच रक्षा सहयोग को बढ़ावा देने के उद्देश्य से ‘बद्र समझौता’ पर हस्ताक्षर किए गए हैं [Fact Refinery, 2024-01-24].
  • अगस्त में पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्की के बीच ‘मक्का संयुक्त रक्षा समझौता’ हुआ था, जिसमें किसी एक देश पर हमले को सभी पर हमला माना जाएगा [Fact Refinery, 2024-01-24].
  • रक्षा विनिर्माण के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने और तकनीकी रक्षा प्रशिक्षण तथा अनुसंधान एवं विकास में मिलकर काम करने का उद्देश्य इस समझौते में शामिल है [Fact Refinery, 2024-01-24].
  • रक्षा समझौते एक सामान्य राजनयिक उपकरण हैं, जिनका उपयोग देशों द्वारा अपने सुरक्षा हितों को आगे बढ़ाने और सहयोग को मजबूत करने के लिए किया जाता है [background knowledge].

हमारा आकलन

हमारी समझ यह है कि यह समझौता क्षेत्रीय सुरक्षा परिदृश्य में एक महत्वपूर्ण कदम है, जो इन देशों के बीच रक्षा सहयोग को मजबूत करता है. यह घटनाक्रम खाड़ी क्षेत्र में बढ़ते तनाव की पृष्ठभूमि में हो रहा है, जो समझौते के रणनीतिक महत्व को बढ़ाता है. यह भी उल्लेखनीय है कि यह समझौता एक अन्य हालिया रक्षा समझौते के बाद हुआ है, जो इन देशों के बीच सुरक्षा सहयोग के बढ़ते रुझान को दर्शाता है.

किस पर नज़र रखें

  • पाकिस्तान के विदेश कार्यालय से ‘बद्र समझौते’ पर आधिकारिक प्रतिक्रिया की प्रतीक्षा है [कतर रक्षा मंत्रालय].
  • रक्षा विनिर्माण के क्षेत्र में सहयोग की विशिष्ट परियोजनाओं और समय-सीमा पर नज़र रखें [तुर्की रक्षा मंत्रालय].
  • समझौते के परिणामस्वरूप रक्षा क्षमताओं में वृद्धि के संकेत, जैसे संयुक्त सैन्य अभ्यास या प्रौद्योगिकी हस्तांतरण, की निगरानी करें [इंडोनेशियाई रक्षा मंत्रालय].
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