पाकिस्तान, तुर्की, इंडोनेशिया और कतर ने एक समझौता किया है, जिसके बारे में भारत में चिंताएं जताई जा रही हैं। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने आजतक के साथ एक विशेष साक्षात्कार में कहा कि पाकिस्तान के साथ अमेरिका के बेहतर होते रिश्तों का असर भारत के साथ उसकी साझेदारी पर नहीं पड़ेगा। रुबियो ने यह भी स्पष्ट किया कि आतंकवाद को लेकर भारत और अमेरिका की चिंताएं समान हैं। उन्होंने 'ऑपरेशन सिंदूर' के दौरान भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव कम करने में अमेरिका की भूमिका का भी उल्लेख किया, लेकिन बातचीत की गोपनीय जानकारी साझा करने से इनकार कर दिया। रुबियो के अनुसार, अमेरिका भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव कम करने के लिए रचनात्मक भूमिका निभाने को तैयार है, क्योंकि वह दोनों पड़ोसी देशों के बीच एक और युद्ध नहीं देखना चाहता है। उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका चाहता है कि भारत और पाकिस्तान व्यापार और वाणिज्य पर ध्यान दें, जिससे दोनों देशों के लोगों के लिए समृद्धि और सुरक्षा के नए अवसर पैदा हो सकते हैं। रुबियो ने आतंकवाद के खिलाफ अमेरिका की कार्रवाई का भी जिक्र किया, जिसमें इस्लामिक स्टेट और अल-कायदा के खिलाफ अभियानों का उदाहरण दिया गया, और अल-कायदा के संस्थापक ओसामा बिन लादेन को मारने की बात कही।
तुर्की-पाकिस्तान-इंडोनेशिया-कतर समझौते की प्रकृति और उद्देश्य को लेकर स्पष्टता का अभाव है, जिससे भारत में चिंताएं बढ़ रही हैं। रुबियो ने स्पष्ट रूप से यह नहीं बताया कि यह समझौता भारत के लिए कितना चिंताजनक है, लेकिन उन्होंने आश्वासन दिया कि अमेरिका भारत के साथ अपनी साझेदारी को महत्व देता है।
ऑपरेशन सिंदूर के दौरान अमेरिका की भूमिका के बारे में रुबियो ने कहा कि जब भी दो देशों के बीच तनाव बढ़ने से बड़े टकराव या युद्ध का खतरा पैदा होता है, तो अमेरिका तनाव कम करने में रचनात्मक भूमिका निभाने की कोशिश करता है। उन्होंने कहा कि अमेरिका भारत और पाकिस्तान दोनों के साथ संपर्क बनाए रखने से ऐसे हालात को रोकने में मदद मिल सकती है जो आगे चलकर बड़े संघर्ष का रूप ले सकते हैं।
हमारी समझ यह है कि संयुक्त राज्य अमेरिका भारत और पाकिस्तान दोनों के साथ अपने संबंधों को संतुलित करने का प्रयास कर रहा है, जबकि यह स्वीकार करते हुए कि दोनों देशों के बीच तनाव संभावित रूप से अस्थिर हो सकता है। रुबियो के बयान से पता चलता है कि अमेरिका भारत के साथ अपनी साझेदारी को महत्व देता है, लेकिन वह पाकिस्तान के साथ भी संबंध बनाए रखना चाहता है। समझौते की अस्पष्ट प्रकृति भारत के लिए चिंता का विषय है, लेकिन अमेरिका ने अभी तक इसे सीधे तौर पर शत्रुतापूर्ण कार्रवाई के रूप में नहीं माना है।
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