केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी की प्रशंसा करते हुए विपक्ष पर निशाना साधा है। रिजिजू ने कहा कि ओवैसी कभी-कभी भारत के राष्ट्रीय हित से जुड़े मुद्दों पर समझदारी की बातें करते हैं, हालांकि उनकी कट्टर मुस्लिम-केंद्रित नीतियों का विरोध किया जाता है। उन्होंने यह भी कहा कि यदि विपक्ष के कुछ नेता उनकी बात नहीं सुनना चाहते तो उन्हें ओवैसी से सीखना चाहिए, और अब यह स्पष्ट हो गया है कि 'भारत-विरोधी गिरोह' कौन हैं। यह टिप्पणी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के समर्थन में ओवैसी के बयान के बाद आई है, जिसमें उन्होंने एलोन मस्क की टिप्पणियों पर भी प्रतिक्रिया दी थी। ओवैसी ने कहा कि वह प्रधानमंत्री मोदी का विरोध करते रहेंगे, लेकिन किसी विदेशी व्यवसायी को भारत के फैसले तय करने की अनुमति नहीं देंगे। राहुल गांधी ने भी मस्क की टिप्पणी पर प्रतिक्रिया दी थी, लेकिन उनकी प्रतिक्रिया ओवैसी से अलग थी। मस्क ने भारत में स्टारलिंक की प्रवेश को लेकर सवाल उठाए थे, और ओवैसी ने इस मुद्दे पर सरकार का समर्थन किया था। मस्क ने आरोप लगाया था कि भारत में कारोबारी हित उनकी कंपनी के बाजार में प्रवेश में बाधा डाल रहे हैं, लेकिन ओवैसी ने इस पर कोई टिप्पणी नहीं की।
हमारी समझ यह है कि किरेन रिजिजू ने जानबूझकर असदुद्दीन ओवैसी की प्रशंसा करके विपक्ष को विभाजित करने का प्रयास किया है। रिजिजू का यह बयान कि ओवैसी कभी-कभी राष्ट्रीय हित में समझदारी की बातें करते हैं, एक रणनीतिक कदम प्रतीत होता है, जिसका उद्देश्य ओवैसी को विपक्ष के अन्य नेताओं से अलग दिखाना है। यह टिप्पणी राहुल गांधी की प्रतिक्रिया से अलग है, जो दर्शाता है कि सरकार विपक्ष के भीतर मतभेदों को उजागर करने की कोशिश कर रही है।
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